રવિવાર, 6 જાન્યુઆરી, 2019

રતિ


આલમ


શખ્સ તમારો


આહવાન


જુમ્બાકો જોશ


कश्मकश चलती रही -

कश्मकश चलती रही, चलती रही,
उम्र यूँ ढलती रही, ढलती रही.

मैं न बोला, वो रहे चुपचाप ही,
बात बस, टलती रही, टलती रही.

तेल का होना ज़रुरी था कहां !
बाती ही जलती रही, जलती रही.

अब अंधेरेमें दिखा कुछ धूंधला:
रौशनी छलती रही, छलती रही.

मौतके बेमौत साएमें सही,
ज़िन्दगी पलती रही, पलती रही.

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